Monday, November 26, 2018

पहली और दूसरी के बच्चों को होमवर्क न दें, बस्ते का वजन 1.5 किलो से ज्यादा न हो

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि पहली और दूसरी के छात्रों को होमवर्क ना दिया जाए। उनके बस्ते का वजन भी डेढ़ किलोग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए। मंत्रालय ने पहली से दसवीं क्लास तक के बच्चों के बस्तों का वजन भी तय कर दिया है। देशभर के स्कूलों को ये निर्देश जारी किए गए हैं। 

पहली-दूसरी के बच्चों को केवल गणित और भाषाएं पढ़ाई जाएं
मंत्रालय के मुताबिक, विषयों की पढ़ाई और बस्तों के वजन को केंद्र सरकार के निर्देशों के हिसाब से ही नियंत्रित किया जाए। शिक्षण संस्थान पहली और दूसरी क्लास के बच्चों को होमवर्क नहीं दे सकते। 

निर्देशों में कहा गया- पहली और दूसरी क्लास के बच्चों के लिए भाषा और गणित के अलावा कोई दूसरा विषय तय नहीं किया जाना चाहिए। तीसरी से पांचवीं तक एनसीईआरटी द्वारा तय भाषा, गणित और पर्यावरण विज्ञान के अलावा दूसरे विषय नहीं पढ़ाने चाहिए।

मंत्रालय ने स्कूलों से कहा कि छात्रों को अतिरिक्त किताबें और सामान लाने को नहीं कहा जा सकता। बस्ते का वजन भी तय सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए।

पहली और दूसरी क्लास के बच्चों के बस्तों का वजन 1.5 किलो से ज्यादा नहीं होना चाहिए। तीसरी से पांचवीं तक बस्तों के वजन की सीमा 2 से 3 किलो तय की गई है।

छठी और सातवीं क्लास तक बस्ते का वजन 4 किलो से ज्यादा नहीं होना चाहिए। आठवीं और नौवीं तक ये सीमा 4.5 किलो है। 10वीं के छात्रों का बस्ता 5 किलो से ज्यादा भारी नहीं होना चाहिए।

 सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की उपस्थित का सही डाटा जुटाने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके तहत सरकारी स्कूल के शिक्षकों की ही तरह अब सभी बच्चों का भी बायोमैट्रिक हाजिरी बनेगी, और वे अंगूठा लगाकर अपनी उपस्थिति स्कूल में दर्ज कराएंगे। इसे नए साल से अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा। स्कूली बच्चों का बायोमैट्रिक हाजिरी ई विद्यावाहिनी योजना के तहत स्कूलों को दिए गए टैबलेट के माध्य से ही बनेगा। ऐसे में सभी जिलों को इसकी तैयारी भी से शुरू करने को कहा गया है।

स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और क्लर्कों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
विभाग का मानना है कि बच्चों की संख्या बहुत अधिक है ऐसे में इसके लिए बड़े स्तर पर तैयारी भी करनी होगी। अत: सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों व क्लर्कों को इसका प्रशिक्षण अभी से देने को कहा गया है ताकि बाद में इसे लेकर कोई परेशानी न हो। मालूम हो कि अभी तक बच्चों की उपस्थित रजिस्टर में मनमाने ढंग से बनती हैं। इस योजना के लागू हो के साथ ही राज्य के करीब 40 से अधिक बच्चों के उपस्थिति का सही डाटा सरकार के पास उपलब्ध हो सकेगा।

विद्यार्थियों की उपस्थिति को लेकर गलत आंकड़े दर्ज करने की है शिकायत
मिली जानकारी के अनुसार छात्रों के लिए बायोमैट्रिक हाजिरी को अनिवार्य करने का मुख्य उद्देश्य स्कूल में छात्रों का नामक के मुकाबले उनकी नियमिति उपस्थिति का सही आंकड़े को जानना है। सरकार को शक है कि कई स्कूल एमडीएम में अधिक राशि लेने के लिए बच्चों की उपस्थिति को अधिक दर्ज कर देते हैं। जबकि वे बच्चे स्कूल में होते ही नहीं है। इसकी प्रकार कई बाद छात्रों की अधिक उपस्थिति स्कूल में दिखलाने के लिए भी रजिस्टर में गलत ढंग से उपस्थित को दर्ज करते हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि स्कूल न आने वाले बच्चों का सही डाटा सरकार को नहीं मिल पाता है। लेकिन बायोमैट्रिक हाजिरी बनने से बच्चों की उपस्थिति का सही आंकड़ा हर दिन का मिल जाएगा।

1 से 12वीं तक के बच्चों की बनेगी हाजिरी
सरकारी स्कूलों के बच्चों की बायोमैट्रिक हाजिरी की बात करें तो अकेले पूर्वी सिंहभूम जिले के करीब 1.50 लाख से अधिक बच्चों को इस योजना में शामिल किया जाएगा। इसके तहत एक सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 1 से 12वीं तक के बच्चों की हाजिरी बायोमैट्रिक सिस्टम के तहत बनेगी। 

इनका है कहना
डीईओ शिवेंद्र कुमार का कहना है कि नए साल से सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले सभी बच्चों की हाजिरी बायोमैट्रिक सिस्टम के तहत बनेगी। ई विद्यावाहिनी योजना के तहत जो टेबलेट स्कूलों को दिया गया है उसी में बच्चे अंगूठा लगाकर अपनी हाजिरी नियमित बनाएंगे। इस योजना को लागू करने के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। अगले चरण में स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के साथ क्लर्कों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

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