Monday, November 12, 2018

क्या अमित शाह का उपनाम वाक़ई फ़ारसी है?

उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने हाल ही में इलाहाबाद और फ़ैज़ाबाद का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर क्रमश: प्रयागराज और अयोध्या कर दिया है.

भाजपा नेता अयोध्या और प्रयागराज जैसे हिंदी नामों को हिंदू संस्कृति का प्रतीक बताते रहे हैं, जबकि फ़ारसी से उपजे नामों को मुग़लकाल में थोपे गए विदेशी प्रतीक के तौर पर देखते रहे हैं.

जब इलाहाबाद का नाम बदलने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि क्यों आपका नाम रावण या दुर्योधन नहीं रखा गया?

इसी सिलसिले में हाल ही में इतिहासकार इरफ़ान हबीब ने कहा था कि अगर भाजपा को फ़ारसी नामों से आपत्ति है तो उन्हें सबसे पहले पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का नाम बदलने पर विचार करना चाहिए क्योंकि 'शाह' शब्द भी फ़ारसी से आया है.

पत्रकार और लेखक अजित वडनेरकर इस लेख में अतीत के पन्नों में इसी 'शाह' शब्द की तलाश कर रहे हैं: -

यही नहीं, पच-पचाकर जो धारा सामने आती है उसमें से यह जानने की इच्छा कि देखें, कौन सिन्ध की धार से आया और कौन काबुल दरिया से. किसमें आमु दरिया का असर है और किसमें सीर का पानी है. "पानी से पानी मिलै, एक रंग ह्वै जाए", हिन्दुस्तान होने के यही मानी हैं और हिन्दू होने के भी, समझदानी कैसी है, उस पर निर्भर करता है.

'शाह' उपनाम भी ऐसा ही एक विषय है. ईरानी मूल का शब्द जिसका प्रयोग सत्ता-प्रमुख के तौर पर होता रहा. सूफ़ियों ने जो आध्यात्मिक सत्ता क़ायम की तो उसके पीरों को भी इसी अर्थ में 'शाह' कहा जाने लगा. बाद में जिस तरह से 'राजा' उपाधि बंटने लगी, उसी तरह 'शाह' का चलन भी हुआ.

ये सभी उपाधियाँ उपनाम की तरह अपना ली गईं. शाह को लेकर दो तरह की धारणाएं हैं. संस्कृत में शास् क्रिया है जिसमें नियंत्रण, प्रबन्धन, नियमन, शासन, दमन, विधान, हुकूमत जैसे आशय हैं. स के ह में बदलाव के चलते शास् का ही रूप शाह् हुआ.

आमतौर पर हिन्दी का शाह उपनाम फ़ारसी शाह से जोड़ा जाता है. यह गलत नहीं, पर प्रत्येक शाह, फ़ारसी वाला शाह भी नहीं. वणिकों में साह उपनाम होता है (जिनमें तेली, पंसारी शामिल हैं) जो 'साधु' से बना है. इन्हें साहू भी कहते हैं.

शिवाजी के पौत्र का पुकारनाम शाहू था. दरअसल यह 'साधु' का ही मराठी रूपान्तर है न कि फ़ारसी शाह से रूपान्तरित. मराठी में ऊकारीकरण की प्रवृत्ति नहीं है. यूँ भी फ़ारसी शाह का मराठी रूप 'शहा' होगा.

राहुल सांकृत्यायन, चतुरसेन शास्त्री जैसे अनेक लेखकों ने शहंशाह की तर्ज़ पर शासानुशास का प्रयोग भी किया है. शास् और अनुशास का मेल. दोनों का अर्थ एक ही है. संस्कृत परम्परा में शासानुशास जैसा पद नहीं मिलता.

ज़ाहिर है, तब इस आधार पर स-ह के रूपान्तर से शाहानुशाही, तदनुरूप शाहंशाह जैसे रूपान्तर के पीछे ठोस आधार नहीं है.

इतिहास की किताबों में हम सबने क्षत्रप और महाक्षत्रप जैसे पदनाम पढ़े हैं. ये ईरानी मूल के शब्द हैं जो संस्कृत कोशों में भी दर्ज़ हैं. दरअसल ये हखामनी साम्राज्य की उपाधियाँ थीं जिन्हें शक अपने साथ-साथ लगाने के शौकीन थे. उस समय तक्षशिला, मथुरा, उज्जयिनी और नासिक शकों की प्रमुख राजधानियां थीं.

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